Wednesday, November 6, 2019

अभिशाप

लड़की होना है क्या पाप
क्या सच में है ये एक अभिशाप?
अगर नहीं तो फिर क्यों सब अपनी
 नज़रों से हमें रहते है नाप

एक बाप स उसकी बेटी 
भाई स उसकी बहन छीन लेते है
और ये अंधा समाज आरोप भी 
उनके कपड़ों और दोस्ती को देते है

कुछ ऐसे हैवानों के चक्कर 
से कितनी तो मासूम जाने 
चली गई बिना कुछ कहे
और हम सब बस तमाशा देखते रहे

माना जिनको लक्ष्मी
का रूप जाता है 
आत्यचर भी उन पर
ही करा खूब जाता है

कपड़े क्या रास्ते भी वो
शैतानों के चक्कर मै बदल लेती है
इस दरिंदे समाज मै बेटी ना
बनियो भगवान बस यही कहती है।

भरे बाज़ार भी जब उछलता
उस नारी का साम्मन है
दुनिया देख के भी बन जाती आंधी
और सुनकर भी बन जाती अनजान है

सारी आजादी और खुशियां भी
अब उसकी इस खोफ मै खो गई है
उससे भी पता है अकेले लड़ना है
इस समाज से दुनिया तो सो गई है

देख के उसकी ये हालत तब 
भी गूंगे और अंधे है सारे
इसलिए उसके आंखों से
बहती है खून की धारे।